चंदौली : चंदौली जनपद के बबुरी थाना क्षेत्र के चनहटा गांव निवासी इन्स्पेक्टर अजय सिंह जो प्रतापगढ़ में तैनात थे, 16 अगस्त को कोरोना बीमारी से लड़ते – लड़ते अपने जिंदगी की जंग बीमारी से हार गए। इन्स्पेक्टर अजय सिंह की गिनती तेज – तर्रार व ईमानदार छवि वाले पुलिस अधिकारियों में होता था। अजय सिंह 2001 में दरोगा बने थे तथा तब से लगभग 20 सालों की नौकरी के बाद, उनके देहांत के बाद, उनके खाते में महज 926 रुपये पाए गए यही नहीं उन्होंने लोगों की आर्थिक मदद करने के चक्कर में अपना बीमा तक नहीं भरा था तथा बीमारी के कुछ दिन पहले ही व्यक्तिगत लोन लिया था।
बिना रिश्वत लिए कुछ ऐसे काम करते थे अजय सिंह
अजय सिंह अपने तो रिश्वत कभी नहीं लेते थे लेकिन साथ ही साथ अपने साथी पुलिस कर्मियों को भी रिश्वत नहीं लेने देते थे और वह यह कार्य भी बहुत प्रेम से ही करा लेते थे। बात उस समय की है जब उन्हे स्वाट टीम प्रभारी बनाया गया तो उन्होंने पूर्व से टीम में काम कर रहे किसी भी पुलिसकर्मी को नहीं बदला बल्कि उन्होंने सभी से कहा कि, आप लोग अगले तीन महीने तक रिश्वत लेना छोड़ कर मेरे साथ काम कीजिए बदले में मैं आप सभी को इतना सम्मान दिलाऊँगा की आप मेरे साथ बिताए ये पल जीवन भर याद रखेंगें।

साथी पुलिस अधिकारियों ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ
इन्स्पेक्टर अजय सिंह के इन विवरणों को देखने के बाद , अजय सिंह के साथ 2001 बैच मे सहपाठी रहे पुलिस इन्स्पेक्टर व अन्य साथी उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं। प्रयागराज में ही तैनात, अजय सिंह के करीबी मित्र रहे इन्स्पेक्टर राकेश सिंह ने कहा कि, “मैं अपनी आखिरी सांस तक अजय सिंह के परिवार की हर संभव मदद करूंगा, 16 अगस्त मेरे जिंदगी का काला दिन है।” राकेश सिंह के अलावा इन्स्पेक्टर धर्मेन्द्र यादव, इन्स्पेक्टर दीपेश सिंह, इन्स्पेक्टर अतुल सिंह, इन्स्पेक्टर बी आर बिन्द, कांस्टेबल वेद तिवारी सहित कई अन्य पुलिस कर्मियों ने अजय सिंह के परिवार के लिए हर संभव मदद करने में लगे हैं।
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